भारत का जागृत समाज ही संघ की सौ वर्ष की तपस्या का पुण्यफल है

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ द्वारा वर्ष पर्यंत समाज से सीधे संपर्क व संवाद के कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
महानगर के विस्तार को दृष्टिगत रखते हुए प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन संघ की नगर रचना तथा महानगर की श्रेणियों के अनुसार किया जा रहा है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक तथा प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक श्री जे नंदकुमार ने शोधार्थी , वैज्ञानिक तथा सीए-सीएस व आर्किटेक्ट श्रेणी के प्रमुख जनों के साथ विभिन्न आयोजनों में संवाद किया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा का वर्णन किया।

आपने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत के अधिष्ठान का मूल तत्व समग्र विश्व में धर्म-स्थापना है। धर्म से तात्पर्य मानव का प्रत्येक काल,परिस्थिति एवं सामाजिकता में अपेक्षित सर्वश्रेष्ठ आचरण , संवेदना व व्यवहार है। डॉक्टर हेडगेवार जी ने भी संघ स्थापना का आधार इन्ही तत्त्वों को रखा। स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में भी भारत का समाज असंगठित तथा निस्तेज था। भारतीय समाज को एकत्व के भाव से संगठित करना तथा अपनी संस्कृति के गौरव को पुनर्स्थापित करना संघ का उद्देश्य रहा।
अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख भारत भूषण ने युवा उद्यमी व मातृशक्ति की प्रमुख जन गोष्ठियों को संबोधित किया तथा उनकी संघ को लेकर जिज्ञासाओं का समाधान प्रदान किया।

युवा उद्यमियों को संबोधित करते हुए भारत भूषण ने संघ स्थापना की पृष्ठभूमि और संघ के कारण विगत सौ वर्षों में हिंदू समाज और देश में आए परिवर्तन को रेखांकित किया।
श्री भारत भूषण ने बताया कि जन्मजात देश भक्त डॉक्टर हेडगेवार ने संघ की स्थापना क्यों की ? लंबी चिंतन प्रक्रिया और सामाजिक जीवन के लंबे अनुभव के पश्चात देश को सबल समर्थ और सशक्त बनाने हेतु व्यक्ति निर्माण की अनुपम पद्धति “शाखा” को विकसित किया। कठोर परिश्रम करके डॉक्टर हेडगेवार ने संघ के कार्य को पूरे देश में पहुंचाया।

बड़ी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति को संबोधित करते हुए श्री भारत भूषण ने बताया कि संघ की शाखा से निकले स्वयं सेवकों ने संपूर्ण देश में हिंदू समाज के संगठन का कार्य किया। साथ ही समाज के अलग अलग क्षेत्रों में भारत के विचार पर आधारित संगठनों की रचना स्वयंसेवकों ने की जिनके अथक परिश्रम से आज भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में हिन्दू समाज स्वाभिमान के साथ खड़ा दिखाई देता है।
इसी प्रकार क्रीड़ा एवं व्यापारिक संगठनों की प्रमुख जन गोष्ठियों में उपस्थित समाज जनों से प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह संयोजक दीपक शर्मा ने संवाद किया। आपने संघ की स्थापना से लेकर अभी तक के मुख्य पड़ाव एवं घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि समाज की समस्याओं का हल एकता एवं सामुहिक प्रयासों से सरलता से संभव होता है। राष्ट्र हित का चिंतन तथा राष्ट्र प्रथम का संकल्प जब प्रत्येक भारतीय के मन में स्थापित हो जाएगा तब भारत विश्व में अपने स्वाभाविक सर्वोच्च स्थान पर स्थापित हो जाएगा।
महानगर की इन सभी गोष्ठियों में बड़ी संख्या में महानगर के प्रमुख एवं प्रबुद्ध जन आत्मीय भाव से उपस्थित हुए।
इसी प्रकार से संघ की नगर-खण्ड रचना के अनुसार 59 स्थानों पर प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन तय हुआ है जिसमें 35 स्थानों पर गोष्ठियां सम्पन्न हुई हैं तथा शेष आगामी सप्ताह में होंगी। सम्पन्न गोष्ठियों में स्थानीय बस्तियों के प्रभावी व्यक्ति संघ से संवाद हेतु उपस्थित हुए।आयोजनों में समाज जन आत्मीयता से उपस्थित हुए । उन्होने संघ के कार्यों को लेकर प्रश्न किए तथा अनेक सुझाव भी प्रदान किए।