जंगल और पेड़ नदियों के परिजन इसी से बचेगी नर्मदा

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नाजिया रहमान, भोपाल

भोपाल। हमारे नदी नाले जो हमारे शहरों से निकलते हैं, वो छोटी नदियों में मिलते हैं और ये नदियां बड़ी नदियों में मिलते हैं। यही क्रम है नर्मदा के प्रदूषित होने का। ये बातें शुक्रवार को राज्य संग्रहालय सभागार में संस्था ग्रीन अर्थ द्वारा आयोजित कार्यक्रम “नर्मदे हर” में नर्मदा समग्र न्यास के सीईओ कार्तिक सप्रे ने कहीं। इस अवसर पर उन्होंने नदियों को जीवित इकाई मान गंदा पानी सीधे नदी में छोडने के खिलाफ एक अभियान चलाने का सुझाव दिया। रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी डॉ. एसपी तिवारी ने बताया कि आज के समय में लगातार तापमान बढ़ रहा है और ये तापमान पेड़ों के कटने के कारण बढ़ रहा है। यदि आंकड़ों की बात करें तो भोपाल का तापमान 45 से 35 डिग्री सेल्सियस लाने के लिए हमें शहर में 5 करोड़ पेड़ लगाने होंगे। तभी शहर का तापमान भी कम होगा और नदियों के सूखने का क्रम भी रुकेगा। उन्होंने बताया कि जंगल नदी की मां है। इसीलिए नर्मदा किनारे के 18 जिलों में जबतक हम जंगल विकसित नहीं करेंगे तब तक सब अंधेरे में ही रहेगा। वहीं जन अभियान परिषद के टास्क मैनेजर सैय्यद शाकिर अली जाफरी ने बताया कि बरगद के पेड़ में 10 लाख लीटर पानी संग्रहण की क्षमता है। वहीं नीम के पेड़ में 5 से 6 लाख लीटर पानी संग्रहण की क्षमता होती है। साथ पीपल के पेड़ में 8.5 लाख लीटर पानी संग्रहण की क्षमता होती है। इन्हीं पेड़ों की त्रिवेणी से नदी को बचाया जा सकता है।

जैविक खेती का हो उपयोग :
समाजसेवी आनन्द पटेल ने बताया कि नर्मदा किनारे किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हों। इससे नदी का प्रदूषण काफी हद तक रोक सकते हैं। वहीं नदी में सिक्के, प्रसाद, हवन सामग्री न डालने की बात पर जोर दिया। वहीं समाजसेवी डॉ. रचना डेविड ने जंगलों के विकास के लिए जापानी मियावाकी तकनीक का उपयोग किया जाए। इस तकनीक के जरिये नर्मदा किनारे 3 साल में ही घना जंगल विकसित किया जा सकता है। जंगल विकसित होने से जमीन की उर्वरता बढ़ेगी और इससे किसानों को फायदा होगा।

साथ ही कार्यक्रम में नवदुनिया के सुशील पांडेय, पत्रिका के हितेश शर्मा, जागरण के पवन श्रीवास्तव,प्रभासाक्षी के प्रधान संपादक पंडित दिनेश शुक्ला, हिमांशु सोनी, हरिभूमि की मधुरिमा राजपाल, दैनिक फ़र्ज़ के रवि आनन्द का सम्मान किया गया। वहीं भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी, डॉ. चंचल जैन, पत्रकार आरिफ मिर्ज़ा, फोटोग्राफर कमल खुशालानी को पर्यावरण प्रेमी सम्मान वहीं डॉ. राकेश गुलानी, उमाशंकर तिवारी, अयान खान, नीरव चतुर्वेदी को सेवा रत्न सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में स्रष्टि विश्वकर्मा ने गणपति वंदना और नटराजन परफोर्मिंग आर्ट्स एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा नर्मदा की व्यथा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी गई।

ग्रीन अर्थ के द्वारा भोपाल शहर में नर्मदे हर कार्यक्रम में शहर के समाजसेवी एवं पीड़ित मानवता के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में लंबे समय से पीड़ित मानवता की सेवा कर रहे कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया और हम और हमारी संस्था ‘sewa’ गौरान्वित महसूस करते हैं की इतने वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच हम जैसे छोटे कार्यकर्ता का सम्मान किया गया जिसके प्रयास सिर्फ और सिर्फ छोटी सी चिड़िया से थे जो आग लगने पर दो बूंद अपनी चोंच में उठाकर आग बुझाने का प्रयास करती है। निश्चित ही जब सम्मान होता है तो सामने सिर्फ और सिर्फ एक चेहरा रहता है और उसके पीछे अनेकों अनेक साथी,सहयोगी मिलकर काम करते हैं। मैं यह पुरस्कार-सम्मान अपने उन सब साथियों को समर्पित करता हूं जिनकी बदौलत से यह सम्मान मिला है और यह पर उस साथी का भी जिक्र करना अति महत्वपूर्ण है जिसको एक धुन सवार हुई और पर्यावरण रक्षा की और वह दिल्ली की ओर भोपाल से साइकिल पर रवाना हो गया और इस कार्यक्रम नर्मदे हर को एक मूर्त रूप दिया।

नर्मदा संरक्षण पर विचार-विमर्श सम्मान समारोह में नटराजन परफॉर्मिंग आर्ट्स एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के सचिव जॉय वाधवानी को सम्मानित किया गया

कार्यक्रम में संस्था के विद्यार्थियो विद्यार्थियों खुशी, सिमरन, सपना दीपक, मोहित, साक्षी, दीपक, खुशी, जैद मुस्कान, पल्लवी, तनीषा, आकाश ,विकास, भूपेंद्र के द्वारा
“मां नर्मदा की व्यथा” नृत्य नाटिका की प्रस्तुति भी दी गई जिसमें नर्मदा नर्मदा के उद्गम से लेकर उनकी दशा वर्तमान दशा तक का वर्णन किया गया

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