हिन्दी का अनथक योद्धा- डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

भारत देश का वैश्विक भाषाई परिचय ‘हिन्दी’ से होता है, और जहाँ देश के कई राज्यों में ही हिन्दी बोलने, प्रयोग करने पर पाबंदियाँ लग रही ऐसे स्वर्णिम भारत में आज भी हिन्दी कमज़ोर और समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हो, उस संघर्षरत राष्ट्र में आज के भागदौड़ भरे दौर में युवाओं का कुनबा यदि हिन्दी भाषा के स्वाभिमान की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहा है तो निःसंदेह यह भाषा के उज्ज्वल भविष्य का भी कारक होगा और राष्ट्र की उन्नति के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।

वर्ष 2016 से मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक युवा लेखक और पत्रकार डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने हिन्दी भाषा के प्रचार और प्रसार के साथ-साथ विस्तार की ज़िम्मेदारी अपने कन्धे पर लेते हुए मातृभाषा डॉट कॉम को शुरू करता है।
पहले एक वेबसाइट से आरम्भ हुई यह यात्रा, जिसमें हिन्दी के लेखकों के लेखन को प्रकाशित करके प्रचारित करने का कार्य शुरू किया, फिर धीरे-धीरे युवाओं का दल सक्रिय होकर जनमानस के हस्ताक्षर अन्य भाषाओं से हिन्दी में बदलवाने की कवायद शुरू हुई। इसी दौरान डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान की नींव रखी। हिन्दी के पास संवैधानिक रूप से राजभाषा का अंगवस्त्र है।
डॉ. अर्पण जैन मूलतः कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के साथ-साथ पत्रकार भी हैं। उनकी 17 वर्षीय पत्रकारिता की यात्रा में सैंकड़ो शहरों में अपने पत्रकार साथियों एवं लेखकों को संगठित कर अनथक हिन्दी योद्धा के रूप में कार्य किया।
वे मातृभाषा डॉट कॉम, हिन्दीग्राम, साहित्यकार कोश, खबर हलचल न्यूज़, मासिक साहित्य ग्राम सहित कई प्रकल्पों के माध्यम से हिन्दी के विस्तार के लिए काम कर रहे हैं।

भाषाई पत्रकारिता और लेखन से जुड़े होने से हिन्दी प्रेमी डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ भारतभर में मातृभाषा उन्नयन संस्थान की इकाइयों का गठन करके आंदोलन संचालित कर रहे हैं, और वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। पूर्व में मानव अधिकार महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व का भी निर्वहन किया।

डॉ. अर्पण जैन’ अविचल’ ने अब तक 15 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और उन्होंने मातृभाषा उन्नयन संस्थान के माध्यम से भारत के 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके लिए उन्हें विश्व कीर्तिमान भी प्रदान किया गया।

इसी के साथ, हिन्दी प्रचार के लिए सतत् प्रयत्नशील हिन्दी योद्धा डॉ. जैन को साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 का ‘अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार’, साहित्य एवं कला अकादमी जम्मू कश्मीर व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति, कश्मीर द्वारा वर्ष 2023 का अक्षर सम्मान सहित कई सम्मान व पुरस्कारों ने सम्मानित किया जा चुका है।
अपनी धुन के पक्के डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ का संकल्प है कि जब तक वे हिन्दी को भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित नहीं करवा देते, तब तक मिठाई नहीं ग्रहण करेंगे। ऐसे संकल्पवान युवाओं की जिद्द के कारण ही भारत में क्रांतियाँ हुई हैं, हमने आज़ादी के स्वप्न को साकार होते देखा है।

कहते हैं युवा का उल्टा वायु होता है यानी युवाओं में वायु की तरह वेग ही उनके संकल्पों की सिद्धि का माध्यम बनता है। डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ जैसे साहसी युवाओं के साथ भारत की साहित्यिक एवं सभी हिंदीप्रेमियों को भी आना चाहिए और भारत में अपनी बोली-अपनी भाषा का महत्व स्थापित करते हुए मेरी हिन्दी-मेरा अभिमान भी गढ़ना चाहिए।