जब वर्दी करें जनता को प्रेरित: आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा

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सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने वाला सिपाही

इंदौर की सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रित करते हुए एक चेहरा ऐसा भी है, जो सिर्फ़ सीटी और चालान बनाने तक ही सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश पुलिस के आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच संवेदनशील हो, तो पुलिसिंग भी समाज-निर्माण का माध्यम बन सकती है।
33 वर्ष की आयु और 13 वर्षों की सेवा के साथ, वर्तमान में इंदौर ट्रैफिक पुलिस के एजुकेशन विंग में पदस्थ आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक अलग पहचान बना चुके हैं।

*सड़क दुर्घटना नहीं, परिवार का टूटते हैं*
देश में सड़क दुर्घटनाएँ केवल आँकड़े नहीं हैं-हर दुर्घटना के पीछे एक परिवार की कहानी होती है। इसी सोच ने सुमन्त सिंह कछावा को “ट्रैफिक की पाठशाला” जैसे अभिनव अभियान की ओर प्रेरित किया। इस पहल के माध्यम से वे स्कूलों, कॉलेजों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
उनका मानना है कि नियमों का पालन डर से नहीं, समझ से होना चाहिए।

*सोशल मीडिया से समाज सेवा तक*
डिजिटल दौर में जहाँ सोशल मीडिया अक्सर दिखावे का मंच बन गया है, वहीं आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा ने इसे जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनाया हैं। सड़क सुरक्षा विषय पर उनके द्वारा तैयार किए गए 2000 से अधिक जागरूकता वीडियो लाखों लोगों तक पहुँच चुके हैं।
इन वीडियो की खास बात है, ये सरल भाषा, ज़मीनी अनुभव और जीवन बचाने का स्पष्ट संदेश देते हैं।

*1000 से अधिक कार्यक्रम, एक ही लक्ष्य*
अब तक वे 1000 से अधिक सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं। इन कार्यक्रमों से छात्र, युवा, वाहन चालक और आम नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
उनका एक ही लक्ष्य है-हर नागरिक को जिम्मेदार सड़क उपयोगकर्ता बनाना।

*सम्मान से ज़्यादा संतोष*
उनकी सेवाओं को देखते हुए पुलिस विभाग, शासन-प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। ख़बर हलचल द्वारा इन्दौर में वर्ष 2025 का नेशनल ब्रिलियन्स अवॉर्ड 2025 भी प्रदान किया है।

आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा कहते हैं-
“अगर मेरी बात से एक भी व्यक्ति हेलमेट पहन ले, तो वही मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
युवाओं के लिए मिसाल
आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा आज सिर्फ़ एक पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल बन चुके हैं। उनका कार्य यह सिद्ध करता है कि वर्दी में रहकर भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
Featured Story के रूप में यह कहानी न सिर्फ़ प्रेरित करती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।

Fact Box | प्रोफ़ाइल एक नज़र में


नाम: आरक्षक सुमन्त सिंह कछावा
उम्र: 33 वर्ष
पद: आरक्षक
विभाग: मध्यप्रदेश पुलिस
कार्यस्थल: इंदौर ट्रैफिक पुलिस
वर्तमान दायित्व: एजुकेशन विंग
सेवा अवधि: 13 वर्ष
विशेष पहल:
“ट्रैफिक की पाठशाला” — सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान
उल्लेखनीय उपलब्धियाँ:
सड़क सुरक्षा पर 2000+ जागरूकता वीडियो
1000+ सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम
स्कूल, कॉलेज, चौराहे एवं सार्वजनिक स्थलों पर निरंतर अभियान
मुख्य उद्देश्य:
सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाना
हर नागरिक को जिम्मेदार सड़क उपयोगकर्ता बनाना
पहचान:
सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग से जन-जागरण का प्रभावी मॉडल
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत पुलिसकर्मी